Monday, May 31, 2010

अपनी पहुँच विचारिकै

अपनी पहुँच विचारिकै, करतब करिये दौर ।तेते पाँव पसारिये, जेती लाँबी सौर ॥

Dont bite more than you can chew. अपनी चादर देख

चतुराई सूवै पढ़ी

चतुराई सूवै पढ़ी, सोई पंजर माहिं।फिरि प्रमोधै आन कौं, आपण समझै नाहिं

चतुराई तो रटते-रटते तोते को भी आ गई, फिर भी वह पिंजड़े में कैद हैं। औरों को उपदेश देता हैं, पर खुद कुछ भी नहीं समझ पाता।

`रहिमन' यह तन सूप हैं

`रहिमन' यह तन सूप हैं, लीजे जगत पछोर।हलुकन को उड़ि जान दे, गरुए राखि बटोर


यह शरीर मानो एक सूप हैं। इससे दुनिया को फटक लेना चाहिए जो सारहीन हो, उसे उड़ जाने दो, और जो भारी अर्थात् सारमय हो, उसे रख ले।

जैसी मुख तैं नीकसै

जैसी मुख तैं नीकसै, तैसी चालै चाल।पारब्रह्म नेड़ा रहै, पल में करै निहाल

मुँह से जैसी बात निकले, उसीपर यदि आचरण किया जाय, वैसी ही चाल चली जाय, तो भगवान् तो अपने पास ही खड़ा है, और वह उसी क्षण निहाल कर देगा।

'रहिमन' मैन-तुरंग चढ़ि

'रहिमन' मैन-तुरंग चढ़ि, चलिबो पावक माहिं।प्रेम-पंथ ऐसो कठिन, सब कोउ निबहत नाहिं


प्रेम का मार्ग हर कोई नहीं तय कर सकता। बड़ा कठिन है उस पर चलना, जैसे मोम के बने घोड़े पर सवार हो आग पर चलना।

होय न जाकी छाँह ढिग

होय न जाकी छाँह ढिग, फल `रहीम' अति दूर।बाढेहु सो बिनु काजही , जैसे तार खजूर

क्या हुआ, जो बहुत बड़े हो गए। बेकार हैं ऐसा बड़ा हो जाना ताड़ और खजूर की तरह। छाँह जिसकी पास नहीं, और फल भी जिसके बहुत-बहुत दूर हैं।

`कबीर' प्रेम न चषिया

`कबीर' प्रेम न चषिया, चषि न लीया साव।सूने घर का पाहुंणां , ज्यूं आया त्यूं जाव


Arun Singh जिसने प्रेम का रस नहीं चखा, और चखकर उसका स्वाद नहीं लिया, उसे क्या कहा जाय? वह तो सूने घर का मेहमान है, जैसे आया था वैसे ही चला गया !


Arvind Mishra One who did not bite the love of God nor absorbed its taste is like a person living in empty house who goes as he comes in

Such a person does not benefit from the human birth which is otherwise designed for realizing God.He comes, stays and vacates the world with no spiritual or real gain.He makes no progress on the road to enlightenment.